***इश्क़***
इश्क़ धनिया है, लहसुन है, पुदीना है
इश्क़ काशी है, काबा है, मदीना है।
इश्क़ लड्डू है, पकौड़ी है, चाय है
इश्क़ राधा है, मीरा है, गाय है।
इश्क़ कान्हा है, भोले है, मोहम्मद है
इश्क़ मुरली है, भजन है इश्क़ सुन्नत है।
इश्क़ तीरथ है हज है दर्शन है
इश्क़ निर्मल है इश्क़ ज़मज़म है।
इश्क़ मेहबूब की चुनरी है, दुपट्टा है
इश्क़ ज़माने की साख पे बट्टा है।
इश्क़ ट्यूशन है, कोचिंग है पढ़ाई है
इश्क़ उल्टी हुई काली कढाई है।
इश्क़ ज़ाहिर है छुपा रुस्तम है
इश्क़ सुख दुख है इश्क़ नम नम है।
इश्क़ सेहरा है इश्क़ दरिया है
इश्क़ इंसानियत का जरिया है।
इश्क़ है तो हम सभी बाकी
इश्क़ का जाम सबको दे साक़ी।
इश्क़ जो करते रहे ज़माने में
उनको सदियां लगी मिटाने में।।