सहर ए वफा ,इक इतमीनान मिल भी जाए,
हुश्न होनहार लाजवाब, दिल मिल भी जाए;
मौजौ के साथ-साथ , खेलना मझधार में ही,
साहिल की तमन्ना का, दिल मिल भी जाए;
टुटकर चुर चुर , हो गया है , आईना ए दिल,
कोई इक हुनर ए आईना, दिल मिल भी जाए,
राहें गुम तलाश है, मंजिल ए महोबत यकीनन,
आशियाना वो इतमीनान, दिल मिल भी जाए;
बेखुदी में गुजर गया है,वक्त का आलम जिंदगी,
हकीकी हुश्न कोई लाजवाब दिल मिल भी जाए;