नेक राह
" मम्मी ! मै अपना विषय बदलना चाहती हूँ ।" रावी अपनी मम्मी से लिपटते हुए कहने लगी ।
" अरे ! ऐसा क्यों कह रही हो ? क्या बात है तुम्हें बायोलॉजी में कोई परेशानी हो रही है क्या ? रावी के इस तरह अचानक विषय बदलने की बात से सुषमा चौंक गई ।
" नहीं मम्मी ! ऐसी कोई बात नहीं है , न जाने क्यों मेरा मन उठ सा गया है पढ़ाई से । " रावी थोड़ा सा उदास होते हुए बोली ।
" अच्छे से बताओ बेटा आखिर बात क्या है , तुम्हारा तो सपना है डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना । अब अचानक क्या हो गया । सुषमा किसी अनजाने भय से डर गई इतनी सी देर में हज़ारों खयाल आ गए दिमाग़ में ,नहीं आने चाहिए थे वो भी।
" मम्मी ! इन दिनों रोज अखबारों और टीवी में दिखा रहे हैं कैसे मरीज के घरवाले केस बिगड़ने के बाद डॉक्टर्स के साथ मारपीट करते हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर अपमानित करते हैं । नहीं मम्मी ! मुझे डॉक्टर नहीं बनना , मुझे अब डर लगने लगा है कल को मेरे साथ भी ऐसा ही कुछ हो गया तो । "
" बस इतनी सी बात , इधर आओ मेरे पास " रावी को प्यार से अपने अंक में भरते हुए सुषमा ने कहा ," देखो बेटा , इस संसार में इंसान अपनी उपलब्धियों पर खुद की प्रशंसा करता है पर जब उसके साथ कोई अप्रिय घटना या अनहोनी घटित हो जाती है तो वो किसको दोष देता है ,,,भगवान को । हे भगवान ! तूने ऐसा क्यों किया वैगरह वैगरह .... । उसी तरह डॉक्टर्स भगवान के भेजे हुए दूत ही तो हैं , वो धरती पर कुछ हद तक भगवान का ही काम करते हैं । इसलिए उन्हें ही दोष दिया जाता है । जब डॉक्टर खुशबरी देते हैं तो ठीक है पर जब वे आय एम सॉरी कहते हैं तब वे गुनहगार । तुम एक बहुत ही नेक राह पर अग्रसर हो अब उससे पीछे मत हटो । मेरी वुड बी डॉक्टर रावी गुप्ता । "
" शुक्रिया मम्मी ! मुझे समझने के लिए और हमेशा मेरा मार्गदर्शन करने के लिए । " चहकते हुए रावी सुषमा के लिपट गई ।
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अनामिका प्रवीन शर्मा
मुम्बई