पवित्रता
पुनम में छिपी
अमावस की रात है
कल्पना और कविता
किताब और कोष का
अब एक मात्र शब्द जो
पद पैसा प्यार
प्रतिष्ठा और पुरस्कार
के बाजार में
नीलाम हुआ है
जो खरीदा
वह भी बदनाम हुआ है
छलिया का छल
बहुरुपिया का मुखौटा
मन का भ्रम जाल है
पवित्रता अब सिर्फ ढाल है।