तेरी यादों की महक जिसके ख़्यालों में मिले
दिलकशी कैसे भला उसको गु़लाबों में मिले
इश्क को मर मर के जियोगे तो समझ पाओगे
इश्क़ वो इल्म नहीं है जो किताबों में मिले
अब नहीं ताब कि कुछ बोलूं मगर मुमकिन है
मेरी रूदाद-ए-सफ़र पाओं के छालों में मिले
इश्क़ में भी है नशा और इबादत में भी
ये जरूरी तो नहीं सिर्फ शराबों में मिले
मेरी खामोशी का कुछ ऐसा सिला दे या रब
मुझको हल मेरे सवालों का सवालों में मिले