में चाहती हूं शाम तुम्हारे साथ गुजरू
में चाहती हूं शाम का हर लम्हा तुम्हारे
साथ गूजारू.....
में चाहती हूं शाम की सहेली संध्या को
तुम्हारे साथ देखू....
में चाहती हूं शाम को पंछियों का कलरव
तुम्हारे साथ सुनू....
मगर ओ मेरे मनवा....कभी तो खुद
लिए समय निकालो....