एक छोटे-से शहर के रामलीला में दशहरा के दिन रावण-वध और उसके पुतला-दहन का कार्यक्रम था। निर्धारित समय पर राम ने रावण का वध किया और अब उसके पुतला-दहन का कार्यक्रम बचा था। रामलीला समिति ने घोषणा किया कि, रावण का पुतला-दहन स्थानीय विधायक मंगेश्वर नाथ द्वारा किया जायेगा, और पुतला-दहन से पहले विधायक जी जनता के समक्ष अपनी बात रखेंगे।
विधायक जी जनता को संबोधित करते हुए बोले!!, दशहरा पर्व हमारे जीवन में बहुत सीख देता है, यह अधर्म पर धर्म की जीत, बुराइयों पर अच्छाई की विजय और दुर्गणों से दूर रहने की सीख देता है। यह बोलने के बाद विधायक जी ने रावण के पुतला-दहन का कार्यक्रम सम्पन्न किया।
उसके बाद विधायक जी का काफिला उनके फार्म हाउस के लिए चल दिया। रास्ते में विधायक जी ने अपने खास गुर्गे लल्लन को फोन किया और बोले कि, क्या बे लल्लनवा! हम जो तुमसे कहे थे वह व्यवस्था पूरी हुई कि नहीं?? लल्लन बोला! नेता जी! यहाँ पूरी व्यवस्था हो गई है, जल्दी आइये बस आपका ही इंतजार हो रहा। थोड़ी देर बाद नेता जी का काफिला उनके फार्म हाउस पहुंचा। वहाँ उम्दा शराब, कबाब और शबाब की पूरी व्यवस्था थी, जैसे ही महफिल जमी, विधायक जी अपने गुर्गो के साथ नशे में टुन्न होकर बार-बालाओं के साथ ठुमके लगा रहे थे और उन पर पैसे लुटा रहे थे।।