सुदंर कविता ..
अपनी यादों में मुझे कभी ,यूं ही ढूँढ़ लेना तुम ।
वहाँ न मिलूं तो दिल की ,धड़कनों से पूछ लेना तुम ।।
मैं हमेशा रहूंगा इन हवाओं में ,फिर भी न दिखूं तो ।
अपनी सांसों से छूं कर ,एहसास कर लेना तुम ।।
मेरी हर गजल की शायरी में ,सदा रहती हो तुम ।
वहाँ भी न मिलूं तो ,अपनी तन्हाइयों में मुझे सुन लेना तुम ।।
शायद हमारी मुलाकात हो या न हो ,मुझे अपने ख्वाबों में बुन लेना तुम ।
जिदंगी तो कांटों से भरी हुई हैं ,मेरे हिस्से के सारे फूल चुन लेना तुम ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला ,हाल .अमदाबाद ।