तारों की मेहफील में तेरी दास्तान छुपी हे,
तितलियों की कि गुनगुनाहट में तेरी आवाज छुपी हे।
खूदा की मेहरबानी होगी तो,
सर उठाकर देखना सितारों मे चमक ने वाले हैं।
मिल जाए ग़र साथ उसका तो,
चाँद पे देखना हमको आसमां पे चमक ने वाले हैं।
तेरी मजबूरियों की कदर करते है वर्ना ये
मोहब्बत क्या चीज़ हे?
यादों मे देखना तेरे अश्कों की कतारों मे भी
मेरा नाम नज़र आने वाला है।
ना मिलना ही तेरे लिए जरूरी है,
तो नज़र भी मत आ ए सनम,
मिलके बिछड़े तो, ज़ख्मों की आग में भी
तेरे मिलने की चिंगारियां भड़कने वाली हे।
तेरी ख्वाहिश का भरम रखते हैं, सो जाते हैं वर्ना,
ये जहां चीज़ हे क्या? कदमों में तेरे रख दूं।
सपनो की दुनिया में देखना हमको,
तेरी सीने मे धडकने वाले हैं।
-Jazbaat Sohail