हराएगी कैसे तु मुझे जिंदगी,
कांटे की राह पर चलना शीख लिया है।
रुलाएगी कैसे तु मुझे जिंदगी,
दर्द से ही दोस्ती कर ली है।
जख्म कैसे तु मुझे देंगी जिंदगी
खुद को ही काबिल बना लिया है।
तु मुझे नाखुश नही कर सकती ए जिंदगी
गम के साथ खुश रहने का शिख़ लिया है।
आगे बढ़ने से तु मुझे नहीं रोक सकती ए जिंदगी
क्योंकि मैंने हर पल को मुठ्ठी में ले लिए हैं।
कैसे गुलाम बनाएगी तु मुझे जिंदगी,
अपनी जिद और महेनत दो गुना बढ़ा दी है।
- सुरेश