#gandhigiri
बात आज से लगभग 8 साल पहले की होगी। मैं ओर मेरी फ्रेंड कॉलेज जाने लगे चौराहा पार करके हम आगे जा रहे थे तो सामने देखा एक शॉप पर कोई बच्चे को मार रहा है हम वहां गए तो देखा शॉपकीपर कोई 8,9 साल के बच्चे को छड़ी से मार रहा था जैसे ही बच्चे के एक छड़ी लगी तो वो बहुत कराहा फ़टे कपड़ों में इतनी ठंड में मार मेरा मन बैचैन हो गया मैं वहां से तुरन्त जाना चाहती थी, पर पता नही क्यों में उस बच्चे के पास गई और शॉपकीपर एक ओर छड़ी उसके मारनी चाही तो मैने उसे हाथ से पकड़ ली। असल मे दर्द अब हुआ जब छड़ी मेरे हाथ मे जोर से लगी। बच्चे की पीड़ा अब जाकर समझ आयी थी । शॉपकीपर ने मुझे जाने के लिए कहा मैंने पूछा तो उसने बताया बच्चे ने चोरी की है और अब बता नहीं रहा है समान कहा है मैंने बच्चे के आंसू पोछे ओर विश्वास दिलाया की उसे कोई नही मारेगा उसने सच बता दिया । फिर मेने उसे समझाया कि ऐसा करना गलत है । हालांकि वो शायद ये समझा ना हो पर मैं समझ गयी थी गलती उसकी नही है उसकी जिंदगी से जुड़े हर उस शख़्श की है जिसने उसको ये शिक्षा दी। उसके मा पापा की जो उसे सही शिक्षा ना दे सके उस शॉपकीपर की भी जो प्यार से उसे समझा भी ना सका उन खड़े लोगो की जो हिंसा को देख रहे थे। ऐसी चीजो से उसे भी गलत ही सीख मिलती। कॉलज आते टाइम मेरे हाथ मे बहुत दर्द हो रहा था हालांकि ये कोई गांधीगिरी नही थी, पर आज सही मायनों में मुझे सत्य, अहिंसा और प्रेम का सही मतलब पता चल गया था ।