शायरी ..
हर फूल शूल से तकरार नहीं करता ।
हर माली उपवन से प्यार नहीं करता ।
खुद ही गिर पडती है कलियों पर शबनम ।
हर तन संजने को श्रृंगार नहीं करता ।।
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सवाल उन का ,जवाब उन का ।
सूकुन उनका ,खिताब उन का ।
हम उन की अंजुमन में सर ।
न रखते तो क्या करते ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला ,हाल .अमदाबाद ।।