कविता ..
हादसों में कहानी ढूँढ़ते हो ।
पसीने में पानी ढूँढ़ते हो ।।
नदियों को तो नाला बना डाला ।
नालों में रवानी ढूँढ़ते हो ।।
ख्वाहिशों को ढो के बुढ्ढे हुए ।
कब्र में जवानी ढूँढ़ते हो ।।
अक्ल खरीदी बेटो के लिए ।
एक बहु सयानी ढूँढ़ते हो ।।
सारे ऐशोआराम राजा की तरह हैं ।
अब अपने लिए वफादार रानी ,
ढूँढ़ते हो ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला ,अमदाबाद ,गुजरात ।