*अजीब सिलसिला है,*
*इस ज़िन्दगी का.*
*कोई खुशियों की चाहत में रोया,*
*कोई दुखों की पनाह में रोया.*
*कोई भरोसे के लिए रोया,*
*कोई भरोसा कर के रोया.!*
*"खुशी" ने वादा किया था वो,पांच दिन बाद लौट आएगी.*
*पर जब "ज़िन्दगी" की,किताब खोल कर देखी.*
*तो कमबख्त ज़िन्दगी ही,चार दिन की थी.!*
*सदा खुश रहे*