लिखा है जो स्लेट के ऊपर
जो सामने है
जो हाथ की पहुंच में है
जो अंगुलियों की पोरो पर है
जो जुबां पर है
जो बहती धार में क्षण कैद है
बस उतना ही , उतना ही वर्तमान है
जो धंधुला गया
जो छुप गया
जो खो गया
जो चित्र है
जो धरती की छाती पर
हरियाली है
जो छाती को भेदता है
जो आंख के पानी में तैरता है
जो पानी में काई है
जो तालाब है
जो बादल है
जो भूख है
जो ठहरे रास्ते हैं
सब अतित है