megha#नारी#ब्लॉग।
अहलिया सी पाषाण बनी मै
जानकी की सी तपिश में,तपी मै।
परखा गया बहुत समझा कोई ना (२)
मीरा से जहर घुट घुट पिये मैंने।
राधा की सी विरह वेदना सही भी मैंने।
परखा गया.......(२)
द्रोपदी की ही तरह दाव लगी मै।
गंगा की सी हुई मट मैली मै।
परखा गया......
उठना होगा तुझे, संभलना होगा खुद ही,
क्योंकि न आएंगे अब राम,ना दिख रहे घनश्याम।
परखा गया..........(२)
उठाई अब तलवार, आत्मसम्मान की ठानी है।
हूं मै रानी लक्ष्मी, मुझ में ही दुर्गा काली है।
हूं मै सृजनकर्ता तो, संहार भी मेरा अधिकार हे(२)
परखा गया बहुत,समझा कोई ना।
की परखा गया बहुत, समझा कोई ना।
नारी होने का गर्व....
मेघा....