वो इंसान बहुत था प्यारा सा, दो लफ्ज़ उससे कहने थे…उलझा था वो कहीं खुद में, कुछ जज्बात उसके ज़हन में थे…मैं कहता कहीं, वो सुनता कहीं…मैं गुनता कुछ, वो कहता कहीं…अच्छा हुआ कुछ ना ही कहा…वो हर्फ़ किसको पढने थे…वो इंसान बहुत था प्यारा सा, दो लफ्ज़ उससे कहने थे…