क्या तुम मानोगे?
मेरा अभी अभी दिल टूटा है
मेरे जेह्न के लाखों तुकडे हुए है
एक चीख चिंगारी बनी नजाने कबसे भड़क रही है
क्या तुम मानोगे?
मेने अभी अभी अपना वजूद खो दिया है
किसी के होने से वाबस्ता था जो
यह चेहरा उसे देख के हस्ता था जो
सुखी पड़ी दाल की हरियाली की तरह सूखा
बेजान लकीरे चहेरे पे तन चुकी है
क्या तुम मानोगे?
अचानक सफ़ेदी ने घेर लिया है मुझको
आँखों से रंग छीन गए है
ऊब गया है सुबह का सूरज
बंध पड़ी है शाम की मुठ्ठी
मुँह फेरा है रातों ने
क्या तुम मानोगे?
तुमने हथेली रख दी और एक ख़्वाब सिमट गया .