"मेहमान देखकर मान और सम्मान बदल जातें हैं...
चढ़ावा कम हो तो आशीर्वाद और वरदान बदल जाते हैं !
वक्त पर मन की मनोकामना पूरी अगर न हो तो...
भक्तों की भक्ति, मंदिर और भगवान बदल जाते हैं!!"
इच्छाओं का भी अपना चरित्र होता है...
खुद के मन की हो तो बहुत अच्छी लगती हैं
दूसरों के मन की हो तो बहुत खटकती है।
जिद चाहिए जीतने के लिए...
हारने के लिए तो डर ही काफी है!!