क्या इसी को कहते हैं जिंदगी ?
बस जिनके लिए , जी रहा हूं यारों
अपनेही कांटे चूभाते हैं, चहुं ओर से, प्यारो
कब तक सबको जिताते रहो, और कब तक खुद हारो
ये हार जीत की बाजिसे तंग हो गए हैं हम, यारो
बस अब तो जाना है उसपार; बुलावा भेजो, ओ सितारों ।
ऐसा जीवन भी क्या जीवन, जो लगे एक बोझ
हमेशा मन ही मन करते रहो अफसोस
तिल तिल मरते रहो हरदम, हर रोज़
गरीबकी किसी को न पड़ी है, न पड़ेगी;
उसका जीवन हमेशा बना रहेगा एक अनचाहा बोज
इस भरी दुनियां में मिला न सच्चा दिल्सोज
Armin Dutia Motashaw