फर्ज
माता - पिता के बगैर कोई नहीं हमारा,
इनके पावन चरणों में स्वर्ग हैं हमारा
माता - पिता का बड़ा कर्ज हैं हम पर,
माता - पिता की सेवा फर्ज है हमारा।
दूध के कर्ज को कोई चुका नहीं सकता,
ममता ऎसी कोई और लूटा नहीं सकता,
माँ के जैसा दुनिया में कोई और नहीं हैं,
माँ सा फर्ज कोई और निभा नहीं सकता।
Uma vaishnav
मौलिक और स्वरचित