तुम उस लड़की को जानते हो
जो हमारे घर के पास रहती थी,
नहीं ना!
तुम उस लड़की को जानते हो
जो मेरे साथ गुल्ली-डंडा खेलती थी,
नहीं ना!
तुम उस लड़की को जानते हो
जो घराट पर मुझे छेड़ती थी,
नहीं ना!
तुम उस लड़की को जानते हो
जो मुझे अच्छा मानती थी,
नहीं ना!
तुम उस लड़की को जानते हो
जो मेरे साथ शादी करना चाहती थी,
नहीं ना!
तुम उस लड़की को जानते हो
जो चढ़ाव-उतार में मेरे साथ थी,
नहीं ना!
इन सब बातों के बाद
तुम मुझे जानते हो,
नहीं ना!
यही न जानना तो हमें खींचता है।
*महेश रौतेला