"भावुकता"
आर 0 के0 लाल
हमारे मन में सदैव कुछ न कुछ विचार आते रहते हैं और उन्हीं के बीच हम कभी कभी भावुक हो उठते है। कुछ लोग इसे मानव की कमजोरी मानते हैं। मगर यह हमें यथार्थ के बहुत पास तक ले जाती है। हमें सच बातों का एहसास कराती है। हम इसकी मदद लेकर सहज ही विभिन्न विषम परिस्थितियों से जूझने का रास्ता ढूंढ सकते हैं।
भावुक विचारों का असर हमारे शरीर पर पड़ता है, फल स्वरूप कभी हमारा चेहरा लाल हो जाता है और कभी हमारे आंसू निकल आते हैं। यह क्षण कमजोर अवश्य है परंतु अगले ही क्षण हम उससे उबरने का तरीका भी सोचने लग जाते हैं जिससे मन में संतोष जागृत होता है और हम जीवन पथ पर अपने को मजबूत महसूस करने लग जाते हैं।
भावुकता हमें गलत करने से रोकती है साथ ही पश्चाताप भी करने में सहायक होती है। इसलिए भावुकता को ईश्वर का दिया हुआ एक पवित्र उपहार मानते हुए उसे उपयोग करना चाहिए। लोग हमारी भावुकता का फायदा न उठा पाएं इसलिए सावधान भी रहना चाहिए।
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