आरजू
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कभी कोई मुकम्मल खुशी मिली नहीं हमको,
ख्वाइसे जो थी वो खुशी मिली ही नहीं हमको।
वैसे तो इस जहान में कोई कमी नहीं हमको,
जो दे दिल को सुकून वो खुशी मिली नहीं हमको।
दर्द को समझे ऎसी दोस्ती मिली नहीं हमको,
वैसे तो हुई दोस्तों की कोई कमी नहीं हमको।
फिर भी कभी कोई शिकायत हुई नहीं हमको,
अब तो जिंदगी से कोई आरजू रही नहीं हमको।
Uma vaishnav
(मौलिक और स्वरचित)