इधर शाम होती है
और उधर सुबह उगती है,
मेरे देश की नदियों में
भारत की सुगंध बहती है।
इधर तारे डूबते हैं
उधर नक्षत्र दिखते हैं,
इस आसमान में
बहुत महान लोग रहते हैं।
हर चीज में गोलाई होती है
हर पहाड़ में ऊँचाई रहती है,
मनुष्य की मुस्कान में
अदृश्य लम्बाई मिलती है।
**महेश रौतेला