प्रेम और मोह में बहुत अंतर है..
जब तुम्हें मुझे खो देने का भय हो, और पा लेने की कामना ..तो समझ जाना तुम्हें मोह हो गया है मुझसे।
लेकिन,
जब तुम्हें मुझे खोने का भय और पाने की कामना ना हो,
तब वास्तविकता में तुम मुझसे प्रेम करने लगे हो।
मेरी दृष्टि में प्रेम इस सब से परे है, जो आपका है उसे खो देने का कोई भय क्यों,
और जो आपका नहीं उसे पा लेने की कामना क्यों।
जीवन में जब भी आपको ये महसूस हो कि आपको प्रेम है तो कुछ क्षण के लिए यह विचार अवश्य करना की क्या मोह से परे प्रेम है। क्योंकि प्रेम में मोह का कोई स्थान ही नहीं है। प्रेम अटूट है, इसे किसी भी बंधन या नाम की ज़रूरत ही नहीं।
#रूपकीबातें