हम बदतमीजी ना करें,
ऐसी किसी की ख्वाहिश है।
उसका भला चेहरा असल नहीं,
उसके अच्छेपन की नुमाइश है।
बदनामी हमारे मुकद्दर की तस्वीर बन गई है,
किसी को नहीं इल्म कि इसके पीछे किसी की ज़ोर आजमाइश है।
मुद्दत से किसी की वाह नही सुनी हमने,
किसी का हमारी तौफीक का इरादा ना था।
सियासत के तिजारत में बिक गए हम तो,
ख़ुदा ने फरमाया ये भी किसी की फरमाइश है।
मेरे उसके लहू का रंग तो एक ही था,
उसको अपनाने का मेरा इरादा भी नेक ही था।
घोंपा उसने खन्जर मेरी पीठ में अक्सर,
मुझे फिर भी उससे अपनेपन की गुंजाइश है।