Megha in matrubharti
subject:man ki bat
#KAVYOTSAV -2
मन ही मन मै उड जाती हूँ, और मनचली हो जाती हूँ।
मन ही मन मै मुस्काती हूँ, और मद्होश हो जाती हूँ।
मन से ही सुनती हूँ, मन की शिकायत, मन को ही लिखती और मन की,ही पढ लेती।
मिल जाता मन से मन तो मन मे समां लेती।
ना राज् आता मन से मन का मिलन तो मन से उतार लेती।
मेघा....✍