आँखों में सपना बनके कोई सजने लगा
देखा उसे पहले भी पर अब वो अपना लगने लगा
क्या वो ही शहजादा है मेरे सपनों की महफिल का
शायद मेरे दिल को भी सजना लगने लगा।।
देखा तुझे जब पहली बार दिल में एक झनकार हुई
बात शुरू कैसे करूँ पहली मुलाकात में तकरार हुई
इस दुनिया को देखकर कदम पीछे हट जाते हैं मेरे
जब मुहब्बत तुमसे किया नहीं तो बिछड़के क्यूँँ बेजान हुई।।
मुहब्बत नाम है गम का यहाँ वादे भी झूठे हैं
छुपा रुस्तम निकला वो जिसने दिलों को लूटे हैं
बेवफाई इस दुनिया में कदम कदम पर मिलती है
बच के रहना मेरे दिल ये दिखावे भी झूठे हैं।।