मन के गगन में
मन के गगन में उड़ते कई विचार,
कुछ सफ़ेद बगुले, कुछ कोयल से काले
कुछ आवारा, कुछ अपने ही पाले
कुछ मुंडेर प्रिय, कुछ उड़ते आसमानी
कुछ कर्कश, कुछ बोलें मधुर वाणी
कुछ अभी अण्डों में क़ैद हैं,
कुछ आलसी कुछ मुस्तैद हैं।
कुछ को उड़ना है दूसरो के पंखों से,
कुछ को निकलना है दूसरो के पंजों से,
कुछ की तीखी चोंच, कुछ की छोटी
कुछ की भूख मांस, कुछ की रोटी
कुछ हवा से बात करते हैं,
कुछ हवा में बात करते हैं।
मन के गगन में उड़ते कई विचार।
#kavyotsav2