Hindi Quote in Poem by Shabnam Sharma

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#Kavyotsav Prernadayak

पोटली
बड़े नाज़ों से पाल पोस
मैंने पकड़ा दी अपने
प्राणों की डोर किसी
अनजान पथिक को,
देना चाहती समस्त
संसार की खुषियाँ,
कुछ कल्पना भरी,
कुछ यथार्थ से जुड़ी
परन्तु कई जगह
असमर्थ हो जाती
दृढ़ता से कह सकती,
मैंने पकड़ाई है तुम्हें
जाते हुए इक यादों भरी
बड़ी कीमती पोटली।
बिटिया, जब कभी भी
मेरी याद आये, खोल
कर कुछ निकाल लेना
उसे इस्तेमाल भी करना
वही है इक याद भरी
संस्कारों की पोटली,
जो तुम्हें कभी भी
भटकने न देगी।

 शबनम शर्मा
अनमोल कंुज, पुलिस चैकी के पीछे,
मेन बाजार, माजरा, तह. पांवटा साहिब,
जिला सिरमौर, हि.प्र. - 173021
मोब. - 09816838909, 09638569237


संस्कार
नन्हीं कली से
कब तू बड़ी हो गई
चल दी शाला, फिर
ससुराल, आज छोड़
मेरा आँगन, जा रही
तू बनने किसी और के
घर की तुलसी,
तो सौंपती हूँ तुझे
सबसे छिपकर इक नन्हीं सी पोटली
सिर्फ संस्कारों से भरी,
कभी भी तुझे
ज़रूरत पड़े, शान्त मन से
खोल लेना, ये तुम्हें देंगी
हर समस्या का हल,
संभाल कर रखना,
चूंकि, जोड़ी है इसमें
मैंने रकम तिल-तिल
करके, सिर्फ दो शब्द
सुनने हेतू,
वाह, क्या माँ रही होगी
इस बेटी की।

 शबनम शर्मा
अनमोल कंुज, पुलिस चैकी के पीछे,
मेन बाजार, माजरा, तह. पांवटा साहिब,
जिला सिरमौर, हि.प्र. - 173021
मोब. - 09816838909, 09638569237

Hindi Poem by Shabnam Sharma : 111165269
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