#Kavyotsav2
मेरा भारत
यह सवाल हरेक के मन में उठता है कि भारत महान
क्यों है?
क्योंकि :-
भारत भूमि वो वो पवित्र धरा है।
जहाँ विश्व गौरव इतिहास भरा है।।
यहां महापुरुषो का है वो नारा।
जिसे सुनकर दुश्मन भी हारा।।
छोड़ गए वो अपने निशाँ।
भट्ट से मिली दुनिया को नयी दिशा।
कण-कण में जिसके महावीर समाया।
प्रेम-अहिंसा का पाठ पढ़ाया।।
बुद्ध ने ऐसी घुट्टी पिलाई।
पाप-अपराध से मुक्ति दिलाई।।
भारत ने ऐसा जो तीर था दागा।
जिसे देख सिकंदर था भागा।।
ऐसी मात जो पृथ्वीराज से मिली।
बन गया गौरी भी भीगी बिल्ली।।
अखंड है जिसका साहस-शौर्य।
भारत का स्वर्णकाल वो शासन मौर्य।।
कला-संस्कृति का विश्व में गौरव दिलाया।
वो विजयी राणा कुंभा कहलाया।।
इतिहास पर लगाईं इक नयी मोहर।
देख वीरांगनाओं का वो जौहर।।
देश भक्ति का जोश था जागा।
जब मैदान में उतरे राणा सांगा।।
80 घाव तन पर खाकर।
बने विजयी स्वाधीनता लाकर।।
देख प्रताप की तेज तलवार।
फिकी पड़ गए अकबर की ललकार।
जो बात-बात पर तलवार उठता,
इसके शौर्य पर अब शीश झुकता।।
जाग उठे जब शिवाजी महाराज।
सो गई तब मुगलो की आवाज़।।
अंग्रेजो की क्या की खूब पिटाई।
जागी जब नारी शक्ति लक्ष्मीबाई।।
दुश्मनो को मारकर भगाया जंगल।
ऐसे वीर तांत्या, नाना और थे मंगल।।
ब्रिटिशराज की नींव गिरा ली।
टीपू की वो तलवार निराली।।
ऐसा आध्यात्मिक नेता आया,
भारतीय संस्कृति को विश्व तक पहुँचाया।
हर युवा में प्रेरणा बनकर है समाया,
वो नरेंद्र, विवेकानंद कहलाया।।
जिसने देश की खातिर छोड़ा जगत को।
नमन है ऐसे भारत पुत्र बोस-भगत को।।
देश को एकता की मजबूत गाँठ थी बाँधी।
सत्य-अहिंसा के पुजारी वो महात्मा गांधी।।
वतन सम्भाला बनकर एक पेहरु।
शास्त्री, कृष्णन और थे नेहरू।।
भामा-साराभाई ने बढ़ाई शान।
देकर विज्ञान को नई दिशा और ज्ञान।|
याद करो 62, 65 और कारगिल की वो लड़ाई।
कदमो में झुककर मुँह की खाई।।
ऐसा हमारा गौरवशाली इतिहास,
फिर भी क्यों होता इसका उपहास।
हम ही मिलकर बनाए इसे कुछ खास,
नवभारत की हमसे यही है आस।।
आओ मिलकर भारत को ऐसा नहलाए।
फिर से विश्व विजेता-विश्व गुरु कहलाए||