लिखना चाहूँ तो भी क्या लिखू
लिखना चाहूँ तो भी क्या लिखू
क्या लिखू उनकी नामर्दी को या फिर उनकी नीच हरकत को
या फिर लिखू उस लडकी की चीखे जो शायद किसी को सुनाई न दी
चिर तो खिंचा गया है पर किसका? उस लड़की या फिर इस समाज का
चिर तो तब भी खिंचा गया था पर किसी मायावी ने बचाया था अब तो वो मायावी भी सिर्फ पत्थर का है,
अँधा समाज बहरे लोग भोली लड़की धूर्त भेड़िये
नोची गयी इज्जत नंगी हुई शिक्षा हाँ हाँ नंगी हुई शिक्षा
वा रे बहादुरों क्या करतब किया तुमने अपनी परवरिश तक को नंगा किया तुमने
चलो अब इस कानून का भी ढोंग देख लो कठगरे मे उड़ती उस लडकी की इज्जत देख लो
ए मेरे इश्वर तू तो सच मूच का ढोंगी निकला इतना होने के बाद भी तू न पिगला
क्या ये लड़की किसी द्रोपती का अंश नही या दिखता तुझे दुशासन नही
जा नही मानता में तुझमे न तेरी गीता कुरान मे जब तक
तू मुझे ये न बतादे लिखना चाहूँ तो भी क्या लिखू
टीवी सीरियल को देख ऐसिड अटैक उसने सीखा
काला कपड़ा बाँध कर, तेज़ाब चेहरे पर फेंका
दर्द से कराहती रही, वो जलन से जलती रही
आँखो की रोशनी जाती रही, सर्जरी चलती रही
चेहरा ऐसा भयानक हुआ आयने में देख डरने लगी
आइने पर परदे दाल दिए, बैठ हालात पर रोती रही
आँसुओ से जलन होने लगी, धन भी ख़त्म होता रहा
एक डर सा बैठ गया मन मे जैसे खड़ा हो कोई आँगन मे
एक इल्तज़ा है, थोड़ा तेज़ाब उस पर भी गिराओ
मौत की सजा थोड़ी है, जलन का अहसास उसे भी कराओ
भरत कुमार
#kavyotsav2