Megha in kavyotsav
#KAVYOTSAV -2
कि पतझड़ का आग़ाज़ है,
बसंत जा रहा है -2
तुम मत घबराना उन तेज़ चलती आँधियों सी हवाओं से,
ये हवाएँ बादलों से मिल साज़िश करेंगी मेघों की,
भास्कर की तपिश से झुलस ना जाना मेरे मीत,थोड़ा सा सबर् करना, कि आसमान से जल्दी ही बरसेगा नीर,
कि पतझड़ का आगाज़ है
बसंत जा रहा है -2
कब रूका है कोई मौसम अपनी इच्छाओं से,
शीत ,बसंत, पतझड़, सावन कि लुकाछिपी ने,
सिखाया हमें जीवन का यही सार है,
चाहे बुरा हो या अच्छा वक्त कहॉं ठहरता है हमारी मर्जी से,
कि पतझड़ का आगाज़ है बसंत जा रहा है-2
मेघा....