#Kavyotsav2
#प्रणय
जब तेरी यादों की बारिश
मेरे तन मन को भिगो जाती है
मैं धीरे से मुस्काती हूँ, शर्माती हूँ
कभी घबराती हूँ, सिमट जाती हूँ
बेल बनकर यादों से लिपट जाती हूँ
फिर तुझमें ही कहीं खो जाती हूँ
मिलकर तुझसे नया रूप पाती हूँ
फिर से दुनिया नई सजाती हूँ
और उसी रंग में रंग जाती हूँ
फिर तेरे प्यार की खुशबू
मेरे घर को महकाती है
मेरी जिंदगी फिर से महक जाती है