#आध्यात्म
दराज़..
बड़े दिनों बाद खोली आज मैंने दराज .....
अपनी जिंदगी की ..
कब का रखकर भूल गया था मै .....
कुछ पुराने रिश्ते ......
नए रिश्ते बनाने की जत्तोजहत में ....
बंद करके , उन्हें भूल ही गया था ....
आज वो टूट गया था ...
नया रिश्ता ..
आज बैठे बैठे अचानक नज़र पड़ी ...
दराज़ पर ...
आज भी चमक बरकरार थी ....
उन पुराने रिश्तों पे ...
मैंने सीने से लगा लिया एक एक को ....
मेरी आँखे भर आयीं .....
दराज़ खुली की खुली रह गई ......