#काव्योत्सव
सुखनवर इश्क
लम्हों ने दास्तां बनाई है
इश्क सुखनवर है मेरा
वारी जाऊं एक इशारे पर
जान, हुकुम तो कर जरा
जो पल गुजरे पहलू में तेरे
मेरी सांस अटकी है वहीं
महकना मेरा आगोश में तेरे
होश छोड़े हैं हमने वहीं
फिर से वही पल दो मुझे
एक प्यास अभी बाकी है
तेरे संग गुजरे लम्हों की
जुस्तजू हर शै पर भारी है।
विनय...दिल से बस यूँ ही