kavyotsv2
स्वरचित
अंतर्मन की आवाज
एक दिन मन इस तरह विचलित हुआ
अंतर्द्वन्द की आँधियों से घायल हुआ।
मन की पीड़ा जब चरम को छू गई
अंतर्मन को किसी ने यूँ कर छुआ।।
इस तरह विचलित न हो कुछ और कर
दुनिया और दुनिया वालों पर गौर कर।
सितारों से आगे जहाँ कुछ और है
औरों को सुकूँ दे उनके दुःख को दूर कर।।
कोशिश तो कर मुफलिसों के चेहरों पर मुस्कान लाने की
बिछड़ों को मिलाने की उजड़ों को बसाने की।
तुझ में ताक़त है हवाओं का रुख बदलने की
तू कोशिश तो कर एक क़दम आगे बढ़ाने की।।
मायूसी और बेबसी के दौर से बाहर निकल
यूँ न दे खुद को सज़ा बेदर्द जमाने की।
ये जिंदगी गर किसी के काम आ जाये
तो खुल जाएँ कई राहें नई पहचान पाने की।।
जमीला खातून
सर्वाधिकार सुरक्षित