*#Kavyotsav Bhawna pradhan*
????
जीवन की आपाथापी पर,
अल्पविराम लगा ले चल।
जीवन में बचे हुए लम्हों से,
कुछ हसीन पल चुरा ले चल।
प्रातः सूरज के किरणों संग,
अपना हाथ मिला ले चल,
पक्षी के कलरव के साथ,
खुद के सुर मिला ले चल।
बचपन के कुछ लम्हों को,
आज जीवन में उतार चल।
बुन ले उन सपनों को तू,
उधड़े थे कभी किसी पहर।
फिर बना कागज की कश्ती ,
खुद में बचपन को पाल चल।
जीवन की आपाधापी पर,
अल्पविराम लगा ले चल।
???
अर्चना सिंह 'जया'