#प्रेम
मै कहाँ तुझसे कभी ज़ुदा था,
कभी लहू बनकर तेरे जिस्म मे बहता रहा
कभी अश्क बनकर आँखों मे ठहरा रहा,
कभी दिल की धड़कन मे तूने मेहसूस किया,
कभी तेरे बोलों मे खुद को कहता रहा,
इस उदासी के खोल को तू उतार फेंक अपने ज़हन से,
मै यहीं हूँ तेरे पास, मै कहाँ कभी तुझसे ज़ुदा था,
तू इन यादों के काले साये से बाहर निकल के तो देख,
मै उस सूरज की किरनो के उजाले मे हूँ,
तू अपना हाथ बढ़ा के पहल तो कर,
मै तेरे हर सवालों के जवाबों मे हूँ
मै यही हूँ तेरे पास, मै कहाँ तुझसे कभी जुदा था