याद है मुझे तुम्हारा पहली बार मेरी नज़रों में आना!
धीमी सी मुस्कुराहट के साथ,गाल में पड़े डिंपल के साथ!
बारिशों की बूंदों को हथेली पर लेकर मदधम से गुनगुनाना!
वो बरसात की एक भीगी शाम ही तो थी!!!
हवा के ज़ोर से तुम्हारे दुपट्टे का लहराना!
बारिशों के पानी से तेरे चेहरे का सराबोर हो जाना!
गीली लटों का तेरे रुखसारो से लिपट जाना!
वो बरसात की एक भीगी शाम ही तो थी!!!
तेरी चूड़ियों का बूंदों के साथ जलतरंग बजाना!
तेरे होंठों पर बूंदों का फिसलना और
अपनी नर्म-ओ-नाज़ुक उंगलियों से बूंदों को हटाना!
वो बरसात की एक भीगी शाम ही तो थी!!!
याद है मुझे तुम्हारा पहली बार मेरी नज़रों में आना!
तुझे देखकर तुझे पाने की ख्वाहिश कर जाना!
उन हसीन यादों को अपनी पलकों पर सजाना!
और फिर उस भीगी शाम का एक पल में गुज़र जाना!!!