#काव्ययोत्सव २.० #भावना प्रधान
उनके हाथ की दो उंगलियां भी
कमाल किया करती हैं
बिना कुछ बोले ही
बवाल किया करती हैं।
कलम की कारीगरी को
वो देती हैं अंजाम
कभी ख़ुद से, तो कभी औरों से
सवाल किया करती हैं।
सहारा अंगूठे का ले
क्या गज़ब ढाती हैं वो
चलाती हैं कलम को
अल्फाजों को उठाती हैं वो
दिल की बातें दिलों तक
पहुंचाने में वो माहिर हैं
कहीं प्यार को जगाती
कभी नफ़रत को सुलाती हैं वो।
दर्द को लिखतीं हैं वो
लिखतीं हैं खुशी को
महसूस करें नज़्म में वो
दिखती हैं उसी को
चाहने वालों की वाह से
वो धमाल किया करतीं हैं
उनके हाथ की दो उंगलियां भी
कमाल किया करती हैं