Hindi Quote in Poem by VIJAY KUMAR SHARMA

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#काव्योत्सव 2
शीर्षक - दीपक और बाती
विषय- दीपक और बाती की उपमा से लड़को ( दीपक) और बाती (लड़कियों) के महत्व व स्थिति का तुलनात्मक विश्लेषण

दीपक से बनी रोशनी, बना दीपक बाती से,
जिस बाती से है वजूद दीपक का,आओ लगाए उसे छाती से ।
बाती बिन दीपक का कोई वजूद नहीं,
रोशनी लेश मात्र भी वहाँ मौजूद नही।
दीपक जलता हुआ, सबको दिखता है,
बाती के बिना जलाकर देखो, दीपक कितना जलता है?
जिस बाती से है............
दीपक सिर्फ दिखावा करता जलने का,
वास्तव में सौभाग्य है उसका ,साथ मिला उसे बाती का।
जो खुद जलकर न्योछावर खुद को करती है,
तम को भगाने में, पीछे जो बिल्कुल नही हटती है।
जिस बाती से................
परिवार में भी दिया और बाती बसते है,
खुद हम क्यों, दोनो को फिर अलग समझते है |
बेटो को ‘कुल का दीपक’, मान उत्सव मनाते है,
बेटियो को पैदा होने पहले ही, क्यों मरवाते है ।
जिस बाती से................
पुरुष होना ही यदि सबूत, कुल दीपक होने से है,
महिला होना भी वजूद, उसका बाती होने से है |
परिवार के लिए दीपक को, रोशनी जो हँसकर देती है,
अपनी इच्छाओं को मारकर भी, वह हँस कर जी लेती है ।
जिस बाती से...............
बाती के न रहने से, रोशनी भी न हो पाएगी,
बेटों के लिए बहुए, फिर न मिल पायेगी |
बेटीयों बिन, घर में खुशियाँ कहाँ से आएगी,
बाती के बिना, फिर रौशनी, दीपक में कहाँ से आएगी?,
बिना रौशनी के विजय ये दुनिया ही वीरान हो जाएगी |
जिस बाती से…...….......

द्वारा
"विजय" कुमार शर्मा

Hindi Poem by VIJAY KUMAR SHARMA : 111160628
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