#Kavyotsav2 #shayari
Ghazal
तू लौट आ मेरी उल्फ़त मेरी वफ़ा के लिये,
बड़ी ज़रूरत है हवा की इस फ़ज़ा के लिये,
महज़ काफ़ी नहीं झुकती निगाह हया के लिये,
सुर्ख़ रूख़्सार भी लगते हैं इस अदा के लिये,
मेरे लबों से भी गुज़रा है ये आम सा मिसरा
मत जाओ मुझे छोड़ के तुम ख़ुदा के लिये,
इस दिवाली पे कोई अहबाब न होगा मेरा,
मैं जलाऊँगा कल चराग़ शोख़ हवा के लिये,
एक मुलाक़ात मेरी जान तू कर ले मुझसे,
किसी मरासिम न पुर्सिश बस जफ़ा के लिये,
Written by-"NISHANT"