kavyotsv 2
स्व रचित
एक फ़ौजी का पत्र
मैं तेरे सपनों का गीत नहीं बन पाऊँगा
हे प्रिये में तेरे मन का मीत नही बन पाऊँगा।
मुझे तो भारत माता की रक्षा का फर्ज निभाना है
देश की मिट्टी और पानी का कर्ज चुकाना है।।
इसीलिए मैं हरदम तेरे साथ नहीं रह पाऊँगा।
हे प्रिये..........
पर अब मुझ से भी ज्यादा साहस तुम्हें दिखाना है।
मेरी सारी जिम्मेदारी अब तुमको ही उठाना है।।
क्योंकि जाते वक्त तुम्हें मैं अपने काम सभी दे जाऊँगा।
हे प्रिये..........
मेरे बूढ़े मम्मी पापा का अब तुम को ही सहारा बनना है।
घर के सभी अभावों से तुमको ही अकेले लड़ना है।।
कठिन परिस्थितियों में तुम्हारा साथ नही दे पाऊँगा।
हे प्रिये..........
बेटी को इतना पढ़ाना तुम अपने "पैरों पर खड़ी हो जाये"।
बेटे को फौजी बना देना मेरे जैसा देश के काम आये।।
बर्थडे और पेरेंट्स मीटिंग में शामिल नहीं हो पाऊँगा।
हे प्रिये..........
बच्चे जब तुम से पूछेंगे "मम्मी पापा को कब आना है"।
तुमको उनका मन बहलाने को एक नया बहाना बनाना है।।
मैं अपनी सुंदर बगिया का माली तुमको ही बनाऊंगा।
हे प्रिये में तेरे मन का मीत नहीं बन पाऊँगा।
मैं तेरे सपनों का गीत नहीं बन पाऊँगा।।
..........जमीला ख़ातून
सर्वाधिकार सुरक्षित