#kavyotsav_2
#बहना तेरे जाने का गम किसको नही था
बहना,तेरे जाने का गम किसको नही था
था खुसी का पल
और आँखे भी नम था
मम्मी के आंसू बहे जा रहे थे
पापा आँखों पर हाथ फेरे जा रहे थे
बाबा के कड़वेपन में उस दिन प्यार देखा था
भैया को अंदर से छिपकर रोते देखा था
इन सबके आंसुओ में तेरा प्यार भरा था
बहना,तेरे जाने का गम किसको नही था
सोच में थे सब कैसे रहेगी
घर का काम ओ कैसे करेगी
भूल गयी है खाना बनाना कबसे
पढ़ने गयी है बाहर जबसे
हॉस्टल से खाना ओ खाया करती थी
खुद से अब तो बनाया करेगी
सबके लवों पर बात यही था
बहना ,तेरे जाने का गम किसको नही था
छोड़ कर चली गयी
हम सभी को
गावँ, घर अपने दोस्तों को
आएगी कही से हरपल
यही आस रहता था
बहना,तेरे जाने का गम किसको नही था
By dileep kushwaha