#काव्योत्सव - २
तु मेरे पास रहेता हैं ,
उमीदें साथ रहतीं हैं ,
तुम्हें में गुनगुनाता हुँ ,
तभी मुस्कान आती हैं ।
तु मुज़से दुर ना जाए ,
यें आंखे नम ना हो जाए ,
जिने के लिए तेरी ये यादे...
कम ना पड जाए ।
बस एक बार आ जाओ ,
यादे संग ले आओ ,
तुम हो एक हँसी तारा ,
जमी पर टुट कर आओ ।
हम्म... हम्म... हम्म...
हो... हो... हो...
हूं गतल कितनी...
ना समझ कितनी...
तुम को ना समज पाइ !!!
दिलों को पास ले आओ ,
किसी के गम को अपना ओ ,
किसी को मुस्कुरा के देखो ,
तभी मुस्कान आती हैं ।