Hindi Quote in Poem by Lakshmi Narayan Panna

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#kavyotsav -2


शब्द मुझसे ये कहते हैं, पिरो लेना तू छन्दों में ।
तेरे अंतस में आये हैं, सफर करके अनंतों में ।।
बनाकर गीत की माला, प्रेम नगरी सज़ा लेना ।
नही गाना मुझे शायर, नफरतों के भूखण्डों में ।।


बारूदों की जुबां बनकर , फ़िज़ा में जब से मैं आया ।
लहू से लाल ये धरती , देख करके मैं पछताया ।।
तू इंशां है , तू इंशां को , सबक इतना सिखा देना ।
रक्त प्यासी हैं शमशीरें , न थामें अबकी दंगों में ।।


मैं हूँ झरनों की झर-झर धुन , बसा नदियों के कल-कल में ।
बाँसुरी की मधुर धुन में , बसा संगीत बन करके ।।
सितारों के खिंचे तारों , के कण-कण में समाया हूँ ।
न बजने दे मुझे वादक , युद्ध मद के मृदंगों में ।


पंछियों की मैं चहकन हूँ , मैं हूँ कोयल की कुंह-कुंह में ।
मैं जिंदा दिल की धड़कन हूँ , मोहब्बत मुझसे जिंदा है ।।
चूड़ियों की खनक में हूँ , बना झनकार पायल की ।
तू पन्ना है मुझे लिखना , प्रेम से उजले पन्नों में ।।


मैं सन्नाटों की खामोशी , अंधेरों का भयानक भय ।
आह बनकरके निकला हूँ , दुखी मन से मेरे शायर ।।
मजहबी आग में जलते , घरौंदों से निकल आया ।
बनाकर मौत का पुतला , मुझे न भर तमंचों में ।।


मैं ही फेंके गए नवजात की , चीखों से निकला हूँ ।
गर्भ में मर रही बेटी की , सिहरन बनके कहता हूँ ।।
हे पन्ना तू मेरी माँ से , इतना सन्देश कह देना ।
तू माता है जगत जननी , न शामिल हो दरिंदों में ।।


तेरी परछाईं से सहमी हुई , बेटी की सिहरन हूँ ।
मैं हूँ फ़रियाद अबला की , लुटे न लाज सड़कों पर ।
दहेजू आग में जलकर , मरे न फिर ..कोई ..बेटी ।
दया बनकरके कहता हूँ , न टांगों उनको फंदों में ।।


किसानों की मैं हूँ बिलखन , मैं गायों की पुकारों में ।
लहलहाती हुई फसलों , औ खलिहानों का कोताहल ।
दुखी मजदूर के माथे से , पसीना बनके टपका हूँ ।
कोई सुन ले जरा उनकी , जो भूखे हैं...घरौंदों में..।।


हूँ कर्कश सिंह की गर्जन , मैं ही हिरणों की सरपट में ।
मैं खरगोशों की फुदकने में , मैं ही फुफकार सर्पों की ।
कपोतों की गुटरगूँ में , सुबह मुर्गों की बँगों में ।
चींटियों का हूँ मैं साहस , मोहब्बत हूँ पतंगों में ।।


बादलों की हूँ गड़गड़ ध्वनि , मैं बारिश की फुहारों में
बगीचों में खिले फूलों में , मैं ख़ुशबू बन समाया हूँ ।
मगन भँवरों के पंखों से , निकलकर भिनभिनया हूँ ।
मैं ही जड़ और चेतन में , मैं ही शामिल परिंदों में ।।


मैं ही गुरुओं की वाणी हूँ , मैं शिष्टाचार बच्चों का ।
मैं हूँ उपदेश गौतम का , मैं ही नानक की शिक्षा हूँ ।
गुरु रविदास के दोहों...., और मीरा के पदों में हूँ ।
हूँ मानवता का पावन भाव , बसा हूँ प्रेम ग्रन्थों में ।

Hindi Poem by Lakshmi Narayan Panna : 111157650
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