#kavyotsav -2
गज़ल......
तेरी बातें मेरे दिल मैं एसे चुबती है,
जैसे आंखों से गोली मारी हो.
यादों मैं आपकी जिंदगी कट गई,
जैसे रुह दिल मैं हो मगर धड़कन रुकी हो.
मैं जानती हु मुज़े आपके प्यार जरुरत नहीं,
मैं तो ए जिंदगी पे आपका नाम लिखने आई हुँ.
हर मुलाकात आपकी चाहत का पैगाम देती है,
जैसे आंखों से प्यार का एकरार हुआ हो.
चलते चलते एसा महेसुस होता है जैसे,
अपना कोई चुपके से देख रहा हो,जैसे.
एक लम्हो मैं सफ़र हो गया जिंदगी का जैसे,
जिंदगी ने अपनी रफ्तार बढ़ा दी हो जैसे.
इस तरह लब्ज़ सोचती है आपको जैसे,
जैसे धड़कन आपकी गुलाम हो गई हो जैसे.
शैमी ओझा "लब्ज़ "