इश्क की गलियों में ना जाना कभी
यहाँ धोखे हैं छलावे हैं और है रुसवाई।
बनावटी दिखावे और बाहरी चकाचौंध है
पत्थर के देवता जहाँ होती ना सुनवाई।।
मखमली चादर में लिपटा
मौत का फरिस्ता वहाँ।
ढूढते रह जाओगे खुद को
कोई ना मिलेगा दर्द के सिवा।।
थक के चकनाचूर होकर
लौटोगे जब इस गली।
कब्र में मिल गये होंगे
तुम्हारे जिस्म औ जिन्दगी।।